Tuesday, 24 January 2017

SPIRIT OF MIND

मन की भावना 




नमस्ते ।। मेरा नाम कचरा पेटी है  वैसे तो लोग मुझे कई नाम से बुलाते है जैसे डस्टबिन, वैस्टबकेट, कुडैदान इत्यादि ।  वैसे देखा जाए तो मेरा कुछ भी स्तर नहीं है फिर भी मै रोजमरा के जीवन का एक ऐसा हिस्सा हूँ की मेरे बीना उपयोग किए हुए आपका दिन पूरा नहीं हुआ होगा ।

आज मै आपसे कुछ अपनी भावना व्यक्त करना चाहती हूँ । यह की लोग मेरा उपयोग तो करते परंतु मेरी देखभाल नहीं करते है। फिर भी मै खुश हूँ की आप मेरा इस्तेमाल तो करते है और जो नहीं करते है उनको मैं कुछ नहीं कह सकती क्योंकी वो लोग मेरे काबू मै नहीं है वैसे तो मुझे कोई अधिकार नहीं है की मै अपनी भावना व्यक्त कर सकू क्योंकी यह भी हो सकता है की मेरी बातो को पढ़ कर हस्से और मजाक बनायेगे  लेकिन फिर भी बोलना चाहती हूँ

यह की लोग मेरा  सही से देखभाल नहीं करते है । कोई मेरे ऊपर थूकता है तो कोई मुझे  लात मरता है तो कोई मुझे उपयोग करने के लिए निशाना बाजी करते और कचरा डालते है कई बार कचरा अन्दर चले जाता है तो कई बार मेरे शरीर पर लगता है तो कई लोग मुझे उखाड़ फैक देते है और उनमे से कई लोग मुझे रुपये कमाने के लिए मुझे कबाड़ी वाले को बेच देते है तो कई लोग मुझे राजनीति मुद्दा बनाते है और वोट मांगते है और जीतते है पर जो रुपये हमरे लिए आता है कई अधिकारी अपने उपयोग मै लाते है और मेरे परिवार का विकसित करण नहीं हो पता है और सारे कचरा का बोझ हम ही उठाना पढता है फिर मै अन्दर ही अन्दर रोती हूँ और खूब रोती हूँ

अगर आपके ऊपर भी ऐसे ही कोई अत्याचार करे तो आपको कैसा लगेगा ? आपको कही ओर किसी के पास बेच दिया जाए तो कैसा महसूस होगा ? अगर आपका भोजन आपके मुख मै ना जाकर कही ओर जाए तो कैसे महसूस होगा ? बोलिए आप कभी मेरे बारे मै सोचा है ? मेरी भावना को सोचा है ? मेरी भावना को कैसे ठेस पोचेगी नहीं सोचा होगा अपने सोचीयगा मेरी भावना को । कई देशो मै मेरी खूब इज्जत होती है वो मेरी देखरेख करते है मुझे साफ-सुथरा रखते है । मै जानती हूँ कि आप सोच रह होगे की मुझ मै जान नहीं पर मुझ मै जान है मुझे भी इज्जत प्यारी लगती है कई देशो मे मेरी  कोई इज्जत नहीं होती है पर अब मुझे अपने देश मै जो सरकार आई  है उससे मुझे बहुत आसा है अगर मेरी भावना को अधिकारी लोग समझ जाए तो मुझे कुछ फयदा होगा मुझे भी ख़ुशी होगी और मुझे एक इस योजना मै मुझे बहुत राहत मिली ' एक कदम  स्वच्छता की ओर ' आपसे मेरी गुज़ारिश है तह आत्मा से की मेरी भी इज्जत करे मै भी यही चाहती हूँ की आप स्वच्छता मै रह आप खूब समृधि पाए । मेरी भावना को समझने के लिए  मेरा आप सभी को धन्यवाद ।।
                                     
                                                                                                           लेखक :- विकास पाण्डेय